हमको डर हैं तो अपने गुरु का
और जमाने से डरते नही हैं।
पक्के आशिक हैं सच्चे गुरु के
कच्ची बाते हम करते नही हैं।।
मौत का डर तो कब से हमारे
दिल से प्यारे गुरु ने निकाला
प्रेम का अपने अमरित पिला के
हमको अब तक गुरु ने ही पाला
मौत खुद उनके चरणों की दासी
इस तरह से वो मरते नही हैं।।
ये जहाँ वालो तुमको पता क्या
कौन बाबा हैं ये मथुरा वाले।
कौन पहिचान सकता हैं ईनको
और जग में है क्या करने वाले।।
वादा एक बार जो कर दिया है
ख्वाब में फिर मुकरते नही हैं।।
वो हुआँ सब जो फ़रमाया इनने
जो कहा वो भी होके रहेगा
जब तू देखेगा आँखों से अपनी
तब जमाने से जा जा कहेगा
चांद सूरज ये रास्ता बदल दे
ये जो कहते बदलते नही हैं।।
देख लेना तू लिख करके रख ले
एक दिन तुझको रोना पड़ेगा।
सख्त अफ़सोस में आँसूओ से
चेहरा अपना भिगोना पड़ेगा।।
सच के सूरज के आगे कभी भी
उल्लू ज्यादा ठहरते नही हैं।।
देख पूरब में लाली हैं छाई
बस जरा देर हैं और बाकी।
करले तैय्यार आंखों को अपनी
अब शहंशाह की निकलेगी झांकी।।
बिन निकाले कचूमर तुम्हारा
देख लेना ये रहते नही हैं।।
हम को डर हैं तो अपने गुरु का
और जमाने से डरते नही हैं।।
???? जयगुरूदेव ????
रचनाकार:- प्रेम देशमुख
जयगुरुदेव आवाज़ टीम